जिस दिन
बेंजामिन की ख़ोजी हुई ख़ून
अपने रगों में लेकर
आवश्यकता के अनुरूप या
अनावश्यक होकर
अनवरत दौड़ने वाला,
एडिसन के नवाब-ज़ादे-
बल्ब, स्मार्ट बल्ब, टेबल लैंप
बेड लाईट... वगैरह वगैरह...
मेरा साथ छोड़ दे।
मैं जब ये जान जाऊं,
कि कम से कम,
कितनी रोशनी चाहिए मुझे जीवन में।
जब मुझे किसी के पल-पल,
ज़िंदगी से कम होते जाने का-
एहसास हो जाए।
जब समझ आ जाए मुझे
कविता-ए-जीस्त की लंबाई।
तुम,
मोमबत्ती बनकर आ जाना।
-रीतेय

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