कलम अमीरी दे या ना दे,
पर नाम अमर कर देती है।
" गर खो जाऊँ मैं दुनिया की भीड़ भाड़ में सड़कों पर, निश्चित मेरी कलम एक दिन, मुझको ढूंढ़ निकालेगी। © Reetey AR
Sunday, 31 July 2016
Friday, 29 July 2016
तुमसे मिलूंगा एक दिन...
यूँ तो हर रोज मुलाकात अपनी हो ही जाती है,
पर मैं मंच पर आकर, तुमसे मिलूंगा एक दिन।
मेरी कविता, कवि नहीं हूँ मैं, बनूंगा एक दिन।
Tuesday, 26 July 2016
मेरा भारत, मेरे कलाम...
गुजर गयी एक हवा ज्ञान की हिंदुस्तां से होकर,
रो रहा देश शोकाकुल हो एक महामना को खोकर।
कौन यहाँ कहता है कि धरती से इक इंसान गया,
वीरान पड़ी हर गलियां है, लगता है हिंदुस्तान गया।
तू भारत का ज्ञान दीप, विज्ञान जगत का तारा है,
जो रहे हमेशा उदीयमान, तू वो अनमोल सितारा है।
तू इ़ंसान वही जिसका हर कर्म धर्म से ऊपर था,
जो लिए चमक दिनकर जैसा, इकलौता भारत भू पर था।
है ऋणी तेरा संपूर्ण जगत, तू मानवता का अग्रदूत,
किस आँचल से फिर पायेगा, भारत तुम जैसा सपूत।
तू था वो इंसान जिसके हाथों में कुरान और गीता था,
नहीं किसी दल के अधीन, जो मानवता का नेता था।
तू युवा देश की युवा सोच, हिंदुस्तां के प्रेरणास्रोत,
एक शिक्षक आजीवन थे तुम, तुम भारत के स्वाभिमान।
तुझमें बसती थी राजनीति, तुझसे पाया 'अग्नि' उड़ान,
तू रत्न वही गौरव करता जिस पर भारत का संविधान।
तू विदा हुआ इस धरती से, पर व्याप्त रहेगा जन जन में।
दिव्य ज्ञान विज्ञान की ज्योति, सर्वदा जलाता हर मन में।
आदर्श मेरे, मेरे कलाम, कुछ तुम्हें समर्पित करता हूँ,
श्रद्धांजलि हैं ये शब्द मेरे, मैं तुझपर अर्पित करता हूँ ।
भारत के ११वें राष्ट्रपति, विज्ञान जगत के महास्तंभ, देश रत्न डाक्टर अबुल पाकिर जैनुलआब्दिन अब्दूल कलाम को समर्पित।
शत शत नमन् !!
© आनंद राज
मैं इंतजार में हुँ...
पेड़ के पत्तों से छनकर तुम तक आ रही होगी।
और अपारदर्शी पर्दा बन तुम्हारी जुल्फें,
रोकती रहेगी कि, कोई किरन मुझ तक न पहुँचे।
जब हरी घास बिस्तर सी होगी,
और असीम ख्वाबों से भरा मेरा सर,
टिकी होगी तुम्हारी गोद में।
तुम्हारी झुकी नजरें, ताक रही होगी मुझको,
और मैं, देखकर तुम्हारी नजरों में,
कुछ कह रहा होउंगा....
मैं इंतजार में हुँ और मेरी अधूरी कविता भी,
जो शायद तुम्हें मिल के पूरी हो जाएगी।