स्वच्छ भारत का हो स्वच्छ दीपावली,
पटाखे गूँजे नहीं, न हो आहत कोई।
मिलकर फूलझड़ियां ही अब जलाएंगे हम।
जला दीपक, दीवाली मनाएंगे हम।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसने मानव बना हमको जीवन दिया।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसने निस्वार्थ हो मार्गदर्शन किया।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसके दम से तिरंगा ये लहरा रहा।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
चाँद तक देश को जो है पहुँचा रहा।
अब जलाएंगे दीपक हम उसके लिए,
जिसके बूते सलामत,राष्ट्र की आण है।
अब जलाएंगे दीपक हम उसके लिए,
जो रत्न है देश का, देश की शान है।
एक दीपक जलाएँ उस माँ के लिए,
पुष्प आंचल का है जिसने अर्पित किया।
एक दीपक जलाएँ, आओ उस नाम से,
लोकहित में है जो नर समर्पित हुआ।
मन की ज्योति जलाने का त्यौहार ये,
इसमें शामिल ईश्वर की हर संतान हो।
धर्म के नाम पर कोई विभक्ति न हो,
ज्ञान दीपक जलाता हर इंसान हो।
अंधियारे में न हो मन का कोना कोई,
दीप संज्ञान का अब जलाएंगे हम।
स्वच्छ भारत का हो स्वच्छ दीपावली,
जला दीपक, दीवाली मनाएंगे हम।
© आनंद राज
पटाखे गूँजे नहीं, न हो आहत कोई।
मिलकर फूलझड़ियां ही अब जलाएंगे हम।
जला दीपक, दीवाली मनाएंगे हम।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसने मानव बना हमको जीवन दिया।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसने निस्वार्थ हो मार्गदर्शन किया।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
जिसके दम से तिरंगा ये लहरा रहा।
एक दीपक जलाएंगे उस नाम से,
चाँद तक देश को जो है पहुँचा रहा।
अब जलाएंगे दीपक हम उसके लिए,
जिसके बूते सलामत,राष्ट्र की आण है।
अब जलाएंगे दीपक हम उसके लिए,
जो रत्न है देश का, देश की शान है।
एक दीपक जलाएँ उस माँ के लिए,
पुष्प आंचल का है जिसने अर्पित किया।
एक दीपक जलाएँ, आओ उस नाम से,
लोकहित में है जो नर समर्पित हुआ।
मन की ज्योति जलाने का त्यौहार ये,
इसमें शामिल ईश्वर की हर संतान हो।
धर्म के नाम पर कोई विभक्ति न हो,
ज्ञान दीपक जलाता हर इंसान हो।
अंधियारे में न हो मन का कोना कोई,
दीप संज्ञान का अब जलाएंगे हम।
स्वच्छ भारत का हो स्वच्छ दीपावली,
जला दीपक, दीवाली मनाएंगे हम।
© आनंद राज