बाज हो पर डर रहे हो,
सांप से तुम किसलिए?
पड़ गयी कमजोर आँखें,
या पंजों में ताकत नहीं है!
सांप से तुम किसलिए?
पड़ गयी कमजोर आँखें,
या पंजों में ताकत नहीं है!
दिन ब दिन तेरे घोसले से,
बच्चे गायब हो रहे हैं।
जानते हो पर बताओ
कितने, कब तक गायब होंगे ?
बच्चे गायब हो रहे हैं।
जानते हो पर बताओ
कितने, कब तक गायब होंगे ?
तुम बदल सकते नहीं वो घोसला,
जो वर्षों से उस पेड़ पर है,
है घर तुम्हारा।
और तुम्हारे घोसले के ठीक नीचे,
केंचुल में खुद को छुपाए,
छुपा एक सांप, जड़ो की आड़ में है।
जानते हो, पर हटा सकते नहीं तुम,
घर है उसका, छोड़कर वो क्यूं हटेगा?
जो वर्षों से उस पेड़ पर है,
है घर तुम्हारा।
और तुम्हारे घोसले के ठीक नीचे,
केंचुल में खुद को छुपाए,
छुपा एक सांप, जड़ो की आड़ में है।
जानते हो, पर हटा सकते नहीं तुम,
घर है उसका, छोड़कर वो क्यूं हटेगा?
जानता हूँ, तुमने समझाया बहुत है,
पर तुम्हारी बातें कब समझी गयी है!
शेष अब, बस एक ही युक्ति बची है,
काम लाओ चोंच और पंजे को अपने,
झोंक दो ताकत, बची है जो भी वय में।
खींचकर बाहर निकालो,
खत्म कर दो।
पर तुम्हारी बातें कब समझी गयी है!
शेष अब, बस एक ही युक्ति बची है,
काम लाओ चोंच और पंजे को अपने,
झोंक दो ताकत, बची है जो भी वय में।
खींचकर बाहर निकालो,
खत्म कर दो।
अब देर मत करना...
नहीं तो एक दिन ये भी घटेगा,
शाम को लौटोगे तुम जब घोसले में,
ठीन नीचे, फैलाये फन फुफकारेगा वो...।
और उपर घोसले में,
बस तुम, अकेले तुम, अकेले तुम बचोगे।
नहीं तो एक दिन ये भी घटेगा,
शाम को लौटोगे तुम जब घोसले में,
ठीन नीचे, फैलाये फन फुफकारेगा वो...।
और उपर घोसले में,
बस तुम, अकेले तुम, अकेले तुम बचोगे।
- आनंद राज 'रीतेय'