26/11
by Anand Raj
वो ताज का दहकना,
मुंबई का दिल दहलना,
जिंदगी की उम्मीद में,
मौत को गले लगाना।
शिवाजी टर्मिनस पर,
गोलियों की वो बौछार।
असहाय भीड़ की,
वो अनगिनत पुकार।
आज भी याद है।
वो जिंदगी के बदले,
मुयस्सर मौत।
वो मानव का,
क्रुरतम करतूत,
नहीं भूलेगा ये भारत,
जिसने खोया
सैकड़ों सपूत।
पाक के नापाक इरादे।
वो शातिं के झूठे वादे।
आज भी याद है।
वीरों की कुर्बानी,
चश्मदीदों की जुबानी।
जिंदगी की यादें,
और यादों में मौत।
वो खूनी शाम,
और खामोश रात।
कोई भुला सकता है क्या?
वो आज भी याद है।
मुंबई का दिल दहलना,
जिंदगी की उम्मीद में,
मौत को गले लगाना।
शिवाजी टर्मिनस पर,
गोलियों की वो बौछार।
असहाय भीड़ की,
वो अनगिनत पुकार।
आज भी याद है।
वो जिंदगी के बदले,
मुयस्सर मौत।
वो मानव का,
क्रुरतम करतूत,
नहीं भूलेगा ये भारत,
जिसने खोया
सैकड़ों सपूत।
पाक के नापाक इरादे।
वो शातिं के झूठे वादे।
आज भी याद है।
वीरों की कुर्बानी,
चश्मदीदों की जुबानी।
जिंदगी की यादें,
और यादों में मौत।
वो खूनी शाम,
और खामोश रात।
कोई भुला सकता है क्या?
वो आज भी याद है।
