Saturday, 7 August 2021

इंडिया दैट इज़ भारत




बढ़ियाँ है गुरु, लगे रहिए!

नाम बदलना अपने आप में ख़तरनाक तरीक़ा है बदलाव लाने का। ऐसा कीजिए आप चाँदी और सोना का नाम बदल कर प्लैटिनम और प्लैटिनम प्रो कर दीजिए बाक़ी प्लैटिनम को प्लैटिनम प्रो मैक्स। 

अब आपको लगेगा की इससे फ़ायदा क्या होगा?  तो गुरु इससे फ़ायदा ये होगा की हिंदुस्तान में तीन तरह का प्लैटिनम हो जाएगा। 

आप फिर पूछोगे की चाँदी और सोना के साथ क्या होगा? तो गुरु उसका इलाज ये होगा की आप डीज़ल और पेट्रोल का नाम बदल कर क्रमशः चाँदी और सोना कर देना। इससे सोने और चाँदी सस्ते हो जाएँगे और एक्स्पनेंसियल  ग्रोथ वाला डीज़ल और पेट्रोल खबर से ऐसे ग़ायब हो जाएँगे जैसे ५०० और १००० के पुराने नोट।और इसके बाद जो होगा वो होगा इस बदलाव का मास्टर्स्ट्रोक , मतलब इस बदलाव के फ़ायदे, जो कि पिछले १० सालों से सवा सौ करोड़ की आबादी पर ठहरी हुई देश की जनता को कुछ इस तरह गिनवा देना -  

-  भाइयो-बहनो, आज से हिंदुस्तान ने एक नयी टेक्नॉलजी का ईज़ाद किया है। हमारे मुल्क की तमाम डीज़ल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियाँ अब क्रमशः चाँदी और सोने पर चलेंगी। घबराइए मत, ये नया ईंधन आपकी पुरानी गाड़ियों को बेकार नहीं होने देगा बस थोड़ी अप्ग्रेडेसन की आवश्यकता होगी । और इसकी प्रक्रिया ठीक वैसी होगी जैसा की आपने आपने ५०० और १००० के नोट को २००० में बदलते वक्त किया था। 

-  भाइयो-बहनो, धैर्य रखिए। हमने आपकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस नए प्रकार के इंधन को काफ़ी कम क़ीमत पर उपलब्ध करवाने का निश्चय किया है। इसे आप पूर्ववर्ती डीज़ल और पेट्रोल के मात्र दोगुने मूल्य पर नज़दीकी रिलायंस सोना-चाँदी पम्प से ख़रीद पाएँगे।

-  एक और ख़ास बात, हमने नज़दीकी सोना-चाँदी पम्प तक जाने के लिए नया राजमार्ग का भी निर्माण किया है ।अब आपको रिलायंस सोना-चाँदी पम्प तक जाने के लिए औरंगज़ेब मार्ग के बजाय कलाम मार्ग पर चलना पड़ेगा। औरंगज़ेब मार्ग हमने तत्काल प्रभाव से मुग़लों को वापस लौटा दिया।

-  और हाँ अब आप सोच रहे होंगे कि आपके पास जो पहले से सोना चाँदी पड़ा है उसका क्या होगा? सोच रहे हैं कि नहीं सोच रहे हैं ? तो भाइयो-बहनो , ये सोना-चाँदी आपकी तिजोरी में पड़ी सोने-चाँदी से बिल्कुल अलग है। आपकी तिजोरी में पड़े-पड़े तमाम सोना-चाँदी अब बेकार हो गए हैं, उसे हमारे नज़दीकी 'डू आई केयर' बैंक लॉकर में जमा कराएँ और बदले में आधे वज़न का ‘प्लैटिनम’ और ‘प्लैटिनम प्रो’ ले जाएँ। आपकी सुविधा के लिए हमने इसका रंग-रूप चाँदी और सोना के तरह ही रखा है लेकिन ये पहले वाले से अलग है। ये नया इंडिया का प्लैटिनम है। रीनेम्ड एंड  रेकग्नायज़्ड बाई इंडिया ओन्ली।

मेरे देशवासियो, अगर आपको ये मज़ाक़ लग रहा है तो ये मज़ाक़ आपके साथ बहुत पहले से चल रहा है। और इसी तरह  चलता रहा तो आने वाले कुछ सालों में देश से ग़रीबी, लाचारी और बेरोज़गारी जैसी समस्याएँ  ख़त्म हो जाएँगी । देश में सिर्फ़ दो तरह के लोग बचेंगे और खबर ये आएगा की हिंदुस्तान में अब कोई गरीब, बेबस, लाचार  और बेरोज़गार नहीं बचा। नया इंडिया में २० फ़ीसदी लोग अमीर हैं और ८० फ़ीसदी आत्मनिर्भर!


-  रीतेय  #Reetey



Friday, 6 August 2021

क्रिकेट : ग्राउंड से गाँव तक

 आजकल सोशल मीडिया पर क्रिकेट के लिए अजीब सा विरोधाभास का माहौल बना हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो क्रिकेट ने जबरन बाक़ी खेलों का जगह ले लिया हो। हम कभी नहीं सोचते कि क्रिकेट में इतने समर्थक, इतना स्टार्डम, इतना पैसा कहाँ से आया? 


ज़्यादा नहीं अगर तीन दशक पीछे जाकर देखें तो १९९२ में क्रिकेट मैच के प्रसारण के लिए दूरदर्शन ने बी॰सी॰सी॰आई॰ से ५ लाख रुपय माँगा था और लगभग २० साल बाद उसी बी॰सी॰सी॰आई॰ ने किसी दूसरे निजी चैनल को अगले ६ साल का प्रसारण प्राधिकरण लगभग ४ हज़ार करोड़ में बेचा? 

मैं सोचता हूँ कि इतने कम समय में इतना कुछ कैसे बदल गया? कहाँ से आए इतने समर्थक? क्यों होता गया क्रिकेट इतना दिलचस्प? ऐसा भी नहीं है कि क्रिकेट की टीम लगातार सर्वश्रेष्ठ स्तर पर खेलती रही या फिर कभी कोई कांट्रवर्सी नहीं हुई। सदी के शुरुआत में ही क्रिकेट में फ़िक्सिंग का घटना सामने आया। २००३ में फ़ाइनल खेलने वाली टीम २००७ में लीग मैच में ही अपने से निम्नस्तरीय टीम से हार कर बाहर हो गयी। 

जितना मैं क्रिकेट को समझ पाया हूँ, इसे इतना जीवंत बनाने में इनके खिलाड़ियों से कहीं ज़्यादा योगदान इस खेल का अपना एक अलग स्वरूप से है। बाक़ी खेलों के अपेक्षा क्रिकेट कहीं ज़्यादा कस्टमाईजेबल और ऐक्सेसिबल है। और यही कस्टमाईजेबिलिटी तथा ऐक्सेसिबिलिटी इसे हिंदुस्तान में ईडन गार्डेन से सुदूर गाँव की गलियों तक पहुँचाने में क़ामयाब रहा है।अधिकारिक तौर पर २२ खिलाड़ियों और दो अम्पायअर के साथ साथ प्रॉपर ग्राउंड और बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों के लिए प्रॉपर किट के साथ खेला जाने वाला यह खेल अपने हर आयाम में कस्टमायज़ होने के लिए तैयार है।

आपके पास २२ लोग नहीं है तो टीम का साइज़ कम कर लीजिए। और टीम साइज़ ४-५ लोगों तक कम किया जा सकता है.. मतलब जितने भी लोग जमा हो उनको बराबर-बराबर बाँट के टीम बन सकती है। अगर लोग विषम संख्या में हो तो बाक़ी बचे को या तो अम्पायअर बना दीजिए या फिर दोनों तरफ़ से खेलने की सहमती दे दीजिए। अगर उतना भी ना हो एक बल्लेबाज़, एक गेंदबाज़ भी काफ़ी है ५-५ ओवर बैटिंग-बॉलिंग करने के लिए। 

६ विकेट नहीं हैं तो ६ डंडे ढूँढ लीजिए, वो भी ना मिले तो १५-१६ ईंट भी काम आ जाएग और अगर वो भी जुगाड़ नहीं हो पा रहा हो तो एक कमर भर ऊँची दीवार पर लक़ीर खींच कर बना दीजिए  विकेट और दूसरे तरफ़ ४-५ चप्पल भी रख देंगे तो नॉन-स्ट्राइक एंड का विकेट तो बन ही जाएगा। वैसे भी दीवारों पर विकेट बन जाने से एक फ़ायदा ये होता है की विकेट कीपिंग और थर्ड-मैन वाला पूरा काम बच जाता है।

बड़ा मैदान नहीं है तो छोटा मैदान ढूँढ लीजिए। वो भी नहीं मिले तो बस इतनी जगह खोज लीजिए जहाँ एक छोर से बल्लेबाज़ी और एक तरफ़ से गेंदबाज़ी हो सके तथा ऑन या ऑफ़ किसी भी साइड चौका लगने लायक़ जगह हो। जगह और कम हो तो वन-टिप वन हैंड भी चलेगा। ऑन या ऑफ़ साइड का रन रखना है या नहीं इसपर भी आपसी सामंजस्य से निर्णय लिया जा सकता है। मतलब क्रिकेट का खेल, क्रिकेट ग्राउंड के साथ-साथ अमूमन किसी भी मैदान पार खेला जा सकता है। यहाँ तक कि बैस्कट्बॉल कोर्ट पर वन-टिप-वन-हैंड वो भी हार्ड-प्लास्टिक बॉल के साथ एक अलग तरह का कॉम्बिनेशन है।

प्रॉपर क्रिकेटिंग किट ना हो तो ड्यूज़ के जगह टेनिस बॉल से खेल लीजिए, टेनिस बॉल ना हो तो प्लास्टिक बॉल भी चलेगा। बैट ना हो तो ढूँढिए कोई तुलनात्मक आकार का लड़की का टुकड़ा और थोड़ी मेहनत लगाकर हैंडल बनाइए.. शॉट मारने पर थोड़ी झनझनाहट होगी हाथों में लेकिन आप क्रिकेट तो खेल ही सकते हैं।

बात अगर समय की करें तो  ज़्यादा समय हो तो ५ या ३ दिन का टेस्ट मैच खेल लीजिए और ना हो तो ५० के जगह २५ ओवर, वो भी ना हो तो २०, १५, १०, ५ जितने ओवर के खेल पर दोनों टीमों की सहमती बने उतने का खेल लीजिए। 

कहने का तात्पर्य यह है कि क्रिकेट का नियम आपको क्रिकेट खेलने से कभी नहीं रोकेगा। ना  ही टीम साइज़ और ना ही ग्राउंड साइज़ कभी बाधा बनेगी। लंदन के लॉर्ड्स से लखीमपुर की गलियों तक अगर खेलनेवालों का मन है तो क्रिकेट का खेल हो जाएगा। और जब तक खेल होता रहेगा लोग जुड़े रहेंगे। लोग जुड़े रहेंगे तो खिलाड़ी, समर्थक, दर्शक, आलोचक, विश्लेषक या क्रिकेट से जुड़ा जो बन सकते हैं बनते रहेंगे।

-रीतेय