" गर खो जाऊँ मैं दुनिया की भीड़ भाड़ में सड़कों पर, निश्चित मेरी कलम एक दिन, मुझको ढूंढ़ निकालेगी। © Reetey AR
एकजुट हो गया पुनः है कौरव - पराजित भीड़, पार्थ, उठा गांडिव चला दुर्जन पर वो ही तीर।
इस बार नहीं है भीष्म कोई, न बाधा हैं गुरु द्रोण, शर साध लक्ष्य पर पार्थ, देख मत मुझे खड़े हो मौन।
- आनंद राज 'रीतेय'