दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें।
दुनिया को हो नफरत प्यारी ,
पर तुम तो मेरी मोहब्बत हो।
इससे न कोई इनकार करे ,
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें। ......... २
दो तेरे कदम, दो मेरे हो…
हमें राह-ए-मोहब्बत मिल जाए।
मैं दीवाना , तू दीवानी,
और, गुल-ए- मोहब्बत खिल जाए।
फिर धरती के इन रिश्तों पर,
ना आसमान इनकार करे।
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें।
दो बातें तेरी, दो मेरी हो ,
मिल एक जुबां से कह जाए।
दास्तां इश्क़ ओ मोहब्बत की ,
न अनकही अधूरी रह जाए।
दो होंठ तेरे, दो मेरे हों.…
कर एक, इश्क़ इज़हार करें।
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें।
आ मिल के आँखें चार करें।
दुनिया को हो नफरत प्यारी ,
पर तुम तो मेरी मोहब्बत हो।
इससे न कोई इनकार करे ,
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें। ......... २
दो तेरे कदम, दो मेरे हो…
हमें राह-ए-मोहब्बत मिल जाए।
मैं दीवाना , तू दीवानी,
और, गुल-ए- मोहब्बत खिल जाए।
फिर धरती के इन रिश्तों पर,
ना आसमान इनकार करे।
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें।
दो बातें तेरी, दो मेरी हो ,
मिल एक जुबां से कह जाए।
दास्तां इश्क़ ओ मोहब्बत की ,
न अनकही अधूरी रह जाए।
दो होंठ तेरे, दो मेरे हों.…
कर एक, इश्क़ इज़हार करें।
दो आँखें तेरी , दो मेरी हो,
आ मिल के आँखें चार करें।
