Monday, 9 March 2015

Culfest'15

जरा नजरें उठा कर देख ले , चहुँओर  की झांकी.
गुजर होली गयी, मेरी झोली में कई रंग है बांकी .
दिखाऊंगा तुझे रंगीन है कितनी मेरी दुनिया .
तेरे जीवन में फिर से रंग भरने आ गया हूँ मैं .

रंग दो जहां को जिस भी रंग में रंगने को जी चाहे.
चलो, दो कदम उस राह, जिसपे चलने को जी चाहे.
हरेक प्रतिभाओं का आधार बनने आ गया हूँ मैं.
तेरी आवाज में हुंकार भरने आ गया हूँ मैं.

तेरे अंदर की चिंगारी को अब शोला बनाना है .
कला तेरे जो अंदर है, जहां को वो दिखाना है. 
तुम्हे संग ले , तेरे जलवे दिखने आ गया हूँ मैं.
तुम्हे फिर मंच पर वापस बुलाने आ गया हूँ मैं.

डफली की धुन पे जब तुम्हारा नाद हो पंचम,
तेरी आवाज को महसूस  करता जब  हो ये सरगम .
तेरे स्वर में , मेरी संगीत भरने आ गया हूँ मैं .
तुम्हें  पर्दों के अब इस पार करने आ गया हूँ मैं .


थिरक लेना तुझे तबलों की जब भी धुन सुनाई दे.
कभी यादों में खो जाना, कि जब बचपन दिखाई दे.
दशक नब्बे की हर यादें संजोकर आ गया हूँ मैं .
तुम्हें फिर से तेरा बचपन दिखने आ गया हूँ मैं.
-आनंद राज  

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