" गर खो जाऊँ मैं दुनिया की भीड़ भाड़ में सड़कों पर, निश्चित मेरी कलम एक दिन, मुझको ढूंढ़ निकालेगी। © Reetey AR
यूँ तो हर रोज मुलाकात अपनी हो ही जाती है, पर मैं मंच पर आकर, तुमसे मिलूंगा एक दिन। मेरी कविता, कवि नहीं हूँ मैं, बनूंगा एक दिन।
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