दो हाथ और दो जोड़ी आँखें / रीतेय
एक वयस्क हाथ के उपर
रखा हुआ एक नन्हा सा हाथ।
और उसे... एकटक देखती हुई,
दो जोड़ी आँखें।
दोनों जोड़ी आँखें, देख रही होती है,
उन दो हाथों में,
अपना अपना कल।
वो कल, जो गुज़र गया है।
वो कल, जो आया नहीं है।
एक जोड़ी आँखों में है यादें,
यादें गुज़रे बचपन की।
और उम्मीद-
उम्मीद कि, एक दिन नन्हा हाथ
ढ़क सकेगा वयस्क होकर बूढ़े हाथों को।
और दूसरी जोड़ी आँखें...
बेखबर है, बे परवाह भी,
पर सुकून में है, खुश है।
जानता है कि नीचेवाला हाथ
रहेगा नीचे तब-तक,
जब-तक उस हाथ को
सहारे की जरूरत नहीं होती।
ये तस्वीर क्षण भर की है,
और कहानी...
हमेशा हमेशा की।
दो हाथ और दो जोड़ी आँखें।
-रीतेय

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