Saturday, 19 July 2025

चोरों की बात

हालिया कोल्डप्ले कॉन्सर्ट समेत अन्य घटनाओं के मद्दे-नज़र

चोरों के हक़ में कही गई यह बात कि चोर को सिर्फ़ चोरी करते वक्त ही पकड़ा जा सकता है, चोरों को एक हद तक छूट ज़रूर देती है कि वे छिप-छिपाकर चोरी करते रहें। एक और बात जो चोरों के हक़ में है, वह यह कि चोर वही कहलाए जो पकड़े जाएँ। जो नहीं पकड़े गए, उन्हें कम से कम दुनिया ने तो चोर नहीं कहा। वे सिर्फ़ और सिर्फ़ आईने के सामने चोर रहे।


अपने हक़ में कही गई इन्हीं बातों को मद्दे-नज़र रखते हुए, अलग-अलग तरह के चोर, अलग-अलग चीज़ों की चोरी लगातार करते रहते हैं। कोई पैसों की चोरी करता है, कोई भावनाओं की, तो कोई भरोसे की। पहले किस्म के चोरों के लिए क़ानून है, इसलिए क़ानून अपने लंबे हाथों से चोर को एक न एक दिन पकड़ ही लेता है। दूसरे और ख़ासकर तीसरे किस्म के चोरों के लिए कोई ख़ास क़ानून नहीं है, इसलिए उनके पकड़े जाने की संभावना भी कम होती है। चूँकि इनके पकड़े जाने की संभावना कम होती है, अतः इस किस्म के चोर ज़्यादा होते हैं। और चूँकि इस किस्म के चोर ज़्यादा हैं, तो आगे बात भी उन्हीं की होगी।


एक तीसरी बात भी है, जो ख़ासकर बहुसंख्यक चोरों के हक़ में है भी और नहीं भी। वह यह कि चोरी जितनी देरी से पकड़ में आती है, नतीजा उतना ही गंभीर होता है। शुरुआती दौर में पकड़े गए चोर, अपने हिस्से की थोड़ी-बहुत सज़ा काटकर एक नई ज़िंदगी शुरू कर लेते हैं, लेकिन वे जिन्हें पकड़े जाने में वक्त लगता है, उन्हें चोरी की आदत लग चुकी होती है। उनके लिए यह सब न्यू-नॉर्मल हो चुका होता है। चोरी करते-करते वे उस हद तक पहुँच जाते हैं जहाँ उन्हें छिप-छिपाकर चोरी करना ठीक नहीं लगता। वे अब दिखा-दिखाकर चोरी करने लगते हैं। वे अब भी अपनी चोरी छुपा रहे होते हैं, पर सिर्फ़ उनसे, जिनके भरोसे की चोरी की जा रही होती है। और एक दिन अगर अनायास वे पकड़े जाते हैं, तो पकड़े जाने पर अपनी चोरी के लिए दुनिया भर की तमाम चीज़ों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं — चाहे निजता का हवाला ही क्यों न देना पड़े। उनके हिसाब से भरोसे और विश्वास की चोरी करना गुनाह नहीं होता, बल्कि गुनाह ये होता है कि बिना उनकी इजाज़त के उन्हें चोरी करते हुए पकड़ा क्यों गया?


ख़ैर, पकड़े जाने के बाद उनके पास क़तरा-क़तरा करके उतना ही समय बचता है कि वे बस दूसरों और खुद के साथ की गई इस चोरी की सज़ा काट सकें। सज़ा खत्म होने के बाद, ऐसे चोरों में अगर रत्ती भर भी इंसानियत बची हो, तो सिर्फ़ आत्मग्लानि बचती है, ज़िंदगी नहीं बचती।


-रीतेय

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