Friday, 28 October 2016

इंतजार हो गये...

अभी - अभी तो बचपन गलियों में गुजरा था,
फिर चलने लगे सड़क पर, जिम्मेदार हो गये।

तब गलतियां छिप जाती थी, बचपन के नाम से,
अब हर भूल के लिए, हम जिम्मेवार हो गये।

अभी - अभी तो उठना सीखा था पैरों पर,
कहा, 'दौड़ जाओ', और हम तैयार हो गये।

फिर  कीमतें खुद की ही लगाते हैं रात दिन,
की, खरीदार भी हुए, और साहूकार हो गये।

जिन आँखों का सपना बना आया जहान में,
शहर आकर उन आँखों का इंतजार हो गये।

- आनंद राज 'रीतेय'

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