अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
मेरे घर में दो दीया गर, एक दीया तेरे घर भी हो,
छत के नीचे हम रहें तो, छत तुम्हारे सर भी हो।
सच, गांव में भी आजकल संबल जताता कौन है...
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
छत के नीचे हम रहें तो, छत तुम्हारे सर भी हो।
सच, गांव में भी आजकल संबल जताता कौन है...
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
हम नये होते गये, रस्मों -रिवाजें तोड़ कर,
शहरवाले हो गये हैं, गांव पीछे छोड़कर।
देखकर पीपल को भी अब, सर झुकाता कौन है..
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
शहरवाले हो गये हैं, गांव पीछे छोड़कर।
देखकर पीपल को भी अब, सर झुकाता कौन है..
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
न्यायालयों में तोड़ती दम, न्याय इंतजार में
अब झूठ के लगने लगे हैं, कीमतें बाजार में।
फिर दिन को दिन और रातों को, रातें बताता कौन है...
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
अब झूठ के लगने लगे हैं, कीमतें बाजार में।
फिर दिन को दिन और रातों को, रातें बताता कौन है...
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
मिट्टी से रिश्ते हमारे, मिल रहे हैं धूल में,
फिर भी यारी आसमां से, कर रहे किस भूल में!
सच, जेब के सिक्कौं की अब कीमत बताता कौन है..
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
फिर भी यारी आसमां से, कर रहे किस भूल में!
सच, जेब के सिक्कौं की अब कीमत बताता कौन है..
अब दिवाली में भला दीपक जलाता कौन है!
- आनंद राज 'रीतेय'
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