बस कुछ और पल, यूँ कह कह के,
रतजगे कराए है तुमने।
खुद सो भी गयी, बिन बतलाए,
मेरी नींद उड़ाए है तुमने।
कई बार हुआ है ऐसा भी,
मैं बैठा रहा, तुम आयी नहीं।
खायर, क्या शिकायत तुमसे करुं,
कम होग, जब तुम कह दोगी
कि, अनजान थी तुम इन बातों से,
रातों से, जज्बातों से....
तुम्हें, ये जहां दिखाया है हमने।
तुम्हें इश्क़ सिखाया है हमने।
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